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Assam Flood Special: असम में हर वर्ष भयंकर बाढ़ क्यों आते हैं ?

दोस्तों असम की पहचान तीन चीजों से होती है, पहला चाय दूसरा तेल और तीसरा बाढ़। जिस के बारे में आज हम बात कर रहे हैं।

Story Highlights
  • अगर इस को सरल भाषा में कहें तो कुल मिलाकर देश में जितने बाढ़ प्रभावित इलाके हैं, उनमें से करीब 10 फीसदी इलाका असम में हैं।

ASSAM FLOOD video – Floods ravage Assam every year. It is one of the most flood-prone states in the country. This year, till now around 42 Lakh people were affected by the flood and around 71 have lost their lives. This is the damage the state bears annually. So why does Assam get flooded every year? explained here . to know every details regarding assam flood Watch  video.

दोस्तों आज के इस वीडीयो में हम चलेंगे देश का उत्तर पूर्वी राज्य असम जो पिछले कई दिनों से  बाढ़ में डूबा हुआ है। आप को जान कर हैरानी होगी के मई के महीने में जब देश में मॉनसून ने दस्तक भी नहीं दी थी तब भी असम के कई जिले बाढ़ में डूब गए थे और रेल याता यात को भारी नुकसान हुआ था। असम में हर वर्ष दो या तीन बार बाढ़ आता है। अब सवाल यह पैदा होता है की आखिर असम में इतना बाढ़ आने के कारण क्या हैं। यही जानकारी आज आप को इस विडिओ में मिलने वाली है  साथ ही हम आप को कुछ विडिओ भी दिखाएंगे जिसे देखने के बाद आप को अंदाजा हो जाएगा की असम में बाढ़ ने किस कदर तबाही मचायी है जिस से निपटने के लिए सरकार और सेना दिन रात काम कर रहे हैं। इस लिए इस विडिओ को आप अंत तक देखिएगया  और उस से पहले आप मेरे चैनल को बोले इंडिया को सब्सक्राईब कर लीजिए और लाल बटन जरूर दबायेगा ।

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दोस्तों असम की पहचान तीन चीजों से होती  है, पहला चाय  दूसरा तेल और तीसरा बाढ़। जिस के बारे में आज हम बात कर रहे हैं।

असम देश का ऐसा राज्य है जो पूरी तरह से नदी घाटी में बसा हुआ है. यहां का कुल एरिया 78 हजार 438 वर्ग किमी का है. इसका 56 हजार 194 वर्ग किमी एरिया ब्रह्मपुत्र नदी की घाटी में बसा है तो बाकी का बचा 22 हजार 244 वर्ग किमी का हिस्सा बराक नदी की घाटी में.

राष्ट्रीय बाढ़ आयोग के अनुसार असम का 31 हजार 500 वर्ग किमी का इलाका बाढ़ प्रभावित है. यानी, असम का जितना एरिया है, उसका 39.58% हिस्सा बाढ़ प्रभावित है.

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अगर इस को सरल भाषा में कहें तो कुल मिलाकर देश में जितने बाढ़ प्रभावित इलाके हैं, उनमें से करीब 10 फीसदी इलाका असम में हैं।

असम में दो प्रमुख नदियां हैं. ब्रह्मपुत्र और बराक. इन दो के अलावा 48 छोटी-छोटी और सहायक नदियां भी हैं. इस वजह से यहां बाढ़ का खतरा ज्यादा है. थोड़ी सी बारिश से भी यहां बाढ़ के हालात बन जाते हैं.

फैलती जा रही है ब्रहमपुत्र नदी

ब बात करते हैं ब्रहमपुत्र  नदी की जो लगातार फैलती जा रही है. इसका कवर एरिया भी बढ़ता जा रहा है. असम सरकार के मुताबिक, 1912 से 1928 के बीच सर्वे किया गया था, तब ब्रह्मपुत्र नदी का कवर एरिया 3 हजार 870 वर्ग किमी था.

इसके बाद 1963 से 1975 के बीच सर्वे हुआ, तब ब्रह्मपुत्र का कवर एरिया बढ़कर 4 हजार 850 वर्ग किमी हो गया.

आखिरी बार 2006 में यहां सर्वे हुआ था, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी का कवर एरिया और बढ़कर 6 हजार 80 वर्ग किमी पर आ गया.

ब्रह्मपुत्र नदी की औसतन चौड़ाई 6 किमी के आसपास है. असम के कुछ इलाकों में ये 15 किमी तक चौड़ी है.

3800 वर्ग किमी खेती की जमीन तबाह हुई

सितंबर 2015 में असम सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की एक रिपोर्ट आई थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 1954 से 2015 के बीच बाढ़ के कारण असम की 3 हजार 800 वर्ग किमी से ज्यादा की खेती की जमीन बाढ़ के कारण बर्बाद हो गई है.

खेती की जमीन बर्बाद होने का सीधा-सीधा असर यहां के लोगों पर भी पड़ रहा है . असम के आर्थिक सर्वे के मुताबिक, यहां की 75 फीसदी आबादी खेती-किसानी से जुड़े काम में लगी है।

बाढ़ से करोड़ों रुपये का नुकसान भी होता है.

असम सरकार के मुताबिक, आजादी के बाद यहां 1954, 1962, 1972, 1977, 1984, 1988, 1998, 2002, 2004 और 2012 में भयंकर बाढ़ आई थी. हर साल औसतन 200 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान बाढ़ से होता है.

असम में बाढ़ आने के कारण

अब अगर असम में आने वाले बाढ़ के कारण की बात करें तो ब्रह्मपुत्र बोर्ड के मुताबिक, हर साल यहां सामान्य से 248 सेमी से 635 सेमी बारिश ज्यादा होती है.

हर घंटे यहां 40 मिमी बारिश होती है. कभी-कभी तो ऐसा होता है जब यहां एक दिन में 500 मिमी से ज्यादा बारिश होती है.

ब्रह्मपुत्र नदी जिस घाटी से होकर गुजरती है, वो बहुत संकरी है. जबकि ब्रह्मपुत्र नदी कई किमी तक फैली हुई है. दोनों ओर जंगल हैं. निचले इलाकों में खेती होती है. ऐसे में यहां रहने के लिए जगह कम है. जब नदी ऊपर से बहती हुई निचले इलाकों में आती है तो इससे बाढ़ आ जाती है।

एक कारण यह भी माना जाता है कि ब्रह्मपुत्र नदी के चलते होने वाला कटाव भी भीषण बाढ़ का एक मुख्य कारण है. कटाव  होने पर निचले इलाकों में हर बार बाढ़ आने पर पानी ओवरफ्लो हो जाता है.

ब्रह्मपुत्र बोर्ड द्वारा तटबंधों का निर्माण

वैसे असम को बाढ़ से मुक्त करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। साल 1980 में ब्रह्मपुत्र बोर्ड एक्ट के तहत एक बोर्ड का गठन किया गया, जिसका काम है ब्रह्मपुत्र नदी पर तटबंध बनाना। इसके तहत पिछले कुछ दशकों में तटबंधों को बनाने और उनके रखरखाव पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन इतना धन खर्च करने पर भी असम को बाढ़ से बचाने में कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।

सर्दी, गर्मी और बारिश के मौसम की तरह ही अब बाढ़ का सीजन भी असम के लोगों की तकदीर बन गया है। असम की भौगोलिक स्थिति इसके लिए काफी जिम्मेदार है।

असम का उत्तरी हिस्सा भूटान और अरुणाचल प्रदेश से लगा है, जो कि पहाड़ी इलाके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण और तापमान के बढ़ने से तिब्बत के पठार पर जमी बर्फ और हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं, जिससे ब्रह्मपुत्र नदी और अन्य नदियों पर बने बांधों का जलस्तर बढ़ जाता है।

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असम में बाढ़ के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार ब्रह्मपुत्र नदी है। इसकी छोटी-बड़ी कुल 35 सहायक नदियां हैं। तिब्बत से आने के बाद अरुणाचल प्रदेश से जब ये नदियां असम में प्रवेश करती हैं, तो पहाड़ी इलाके से सीधे मैदानी इलाके में आ जाती हैं, जिसकी वजह से ज्यादा तबाही होती है। हर साल चीन, भूटान, नेपाल और पड़ोसी राज्यों से छोड़े गए पानी के कारण असम में नदियों पर बने तटबंध टूट जाते हैं, इस वजह से भी पानी रिहायशी इलाकों में भर जाता है।

अगर चीन वक्त पर ब्रह्मपुत्र के पानी से जुड़ी जानकारी देने लगे तो असम में बाढ़ से होने वाली बर्बादी को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा असम में बनाए गए बांधों से केवल बिजली बनाई जा सकती है, लेकिन उनमें पानी जमा करने का कोई इंतजाम नहीं है। असम को बाढ़ से बचाने के लिए ऐसे तटबंध बनाने होंगे, ताकि नदी,  किनारों को न काट पाए, लेकिन अभी तक ऐसी कोई भी योजना कारगर नहीं हो पाई।

इसके अलावा बाढ़ की समस्या के लिए मानवीय गलतियां भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। कम जगह में ज्यादा लोगों के रहने की वजह से भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. 1940-41 में यहां प्रती  किमी 9 से 29 लोग रहते थे. लेकिन अब हर एक किमी में तकरीबन 200 लोग रहते हैं.

आबादी बढ़ने के साथ-साथ लोग नदियों के पास बस्तियां बसाने लगे और जंगल काटे जाने लगे। सरकार द्वारा नदियों के करीब स्थायी निर्माण की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

दोस्तों असम में हर वर्ष आने वाले भीषण बाढ़ और उस से होने वाली तबाही के बारे में आप क्या सोचते हैं कॉमेंट  बॉक्स में अपनी राय जरूर दीजिए, विडिओ को लाईक कीजिए, दोस्तों में शेयर कीजिए और मेरे चैनल को सब्सक्राईब कीजिए ।

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दोस्तों आज के इस वीडियो में इतना ही अगले विडिओ में फिर मिलेंगे और बताएंगे की इंडिया क्या बोल रहा है। तब तक के लिए नमशकार।

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